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Born Again
born again ये शब्द मसीह प्रभु और प्रेरितों को बोलने की जरूरत क्यों पड़ी होंगी??
calendar_today18 April 2026


born again ये शब्द मसीह प्रभु और प्रेरितों को बोलने की जरूरत क्यों पड़ी होंगी??
और क्या ये सिर्फ नए नियम मै ही हमे मिलता है या तनाक यानी पुराने नियम मै भी हम इसको देखते है???
अगर हम शुरुआत में जाए तो वहां देखते है कि परमेश्वर ने मनुष्य यानी नर और नारी को अपने स्वरूप में और समानता में बनाया,
अगर उनको स्वरूप और समानता में बनाया तो फिर नए आदम यानी मसीह को भेजने की क्या जरूरत पड़ी ??
और अगर हम ये सोचते है कि बॉर्न अगेन ये जो concept है वो सिर्फ नए नियम में मिलता है तों, हम उसमें कुछ मिस कर रहे है, जिसे समझना हमारे लिए जरूरी है.
निकोदेमोस भी एक यहूदी थे, और वो सिर्फ यहूदी ही नहीं बल्कि यहूदियों के सरदार और गुरु भी थे, तो उनको नए सिरे से जन्म लेने के लिए मसीह ने क्यों बोला होगा?
जैसे लोगो का कहना है और कुछ ऐसा सोचते भी है कि, नए सिरे से जन्म लेना सिर्फ अन्यजाति के लिए ही है, तो क्या ये सही है?
अगर हम देखे कि यहूदी लोग जो पहले से ही इसराइली थे, उनको अगर सब पता था तो मिसर से निकलने के बाद उनको आज्ञाएं क्यों दी गई ???
और जब उन्हें जब परमेश्वर पिता ने मन्ना दिया तो, उन्हें शब्बात को याद दिलाना क्यों जरूरी पड़ा, ये सब सवाल सोचने वाले है जिसका उत्तर वचन खुद ही हमे देता है.
और इसी तरह जब हम प्रेरित पत्रस के पहली पत्री में पढ़ते है, तो उसमें उन्होंने भी बोला है कि, हमे वचन के द्वारा नए सिरे से जन्म लेना है.
आइए वचन से पढ़ते हैं…
1 पतरस 1:23
क्योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीविते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।
अगर हम इस पत्री को पढ़ते है,तो संत पत्रस यहां ये बाते किसको लिख रहे है ये देखने पे सब बाते स्पष्ट हो जाएगी,
जैसे कि,
1 पतरस 1:1
पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्तुस, गलातिया, कप्पदूकिया, आसिया, और बितूनिया में तितर-बितर होकर रहते हैं।
यहां ये वो लोग हम देखते है, और इनके उन इलाके को देखते है,
जिन्हें संत पत्रस लिख रहे है, ये वो लोग थे जो पेंटकॉस के पर्व के दिन इकट्ठे हुए थे और जिनको संत पत्रस ने उपदेश दिया था.
ये सब वो इसराइली लोग थे जो इन इलाकों मैं तितर बितर होकर रह रहे थे. वो सब शब्बात मना रहे थे, पर्व मनाते थे तो उनको वचन सुनाने की जरूरत क्यों पड़ी? और संत पत्रस ने उन्हें उपदेश क्यों दिया जब उन्हें पहले से सब पता था…
वचन से कुछ बातों को समझते है,
प्रेरितों के काम 2:9-11
9] हम जो पारथी, मेदी, एलाम लोग, मेसोपोटामिया, यहूदिया, कप्पदूकिया, पुन्तुस और आसिया,
10] और फ्रूगिया और पंफूलिया और मिस्र और लीबिया देश जो कुरेने के आस-पास है, इन सब देशों के रहनेवाले और रोमी प्रवासी,
11] अर्थात् क्या यहूदी, और क्या यहूदी मत धारण करनेवाले, क्रेती और अरबी भी हैं, परन्तु अपनी-अपनी भाषा में उनसे परमेश्वर के बड़े-बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।”
प्रेरितों के काम 2:37
तब सुननेवालों के हृदय छिद गए, और वे पतरस और अन्य प्रेरितों से पूछने लगे, “हे भाइयों, हम क्या करें?”
इन वचनों में हमे मिलता है, कि ये जो लोग है जिन्होंने संत पत्रस द्वारा उपदेश को सुना, तो उनके मन छिद गए.
और संत पत्रेस ने उन्हें कहा कि, मन फिराव और सब मसीह प्रभु के नाम से बपतिस्मा लो और तुम पवित्र आत्मा वरदान में पाओगे…
और उसी तरह संत पत्रस ने परमेश्वर के वचन से कहा कि हमारा नए सिरे से जन्म उसके वचन से ही होगा.
तो जब तक हमारे हृदय उसके वचन से छीद नहीं जाते तब तक हमारा नया जन्म नहीं हो सकता.
हम संत पत्रस की पत्री को आगे जारी रखे तो, उसके दूसरे अध्याय के 9 से 11 देखे तो वहां ऐसा लिखा है,
1 पतरस 2:9-11
9] पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।
10] तुम पहले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर की प्रजा हो; तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
11] हे प्रियों मैं तुम से विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
तो क्या ये अभी जो हमने पढ़ा ये बाते आपने पहले भी कही सुनी या पढ़ी है???
जी सही सोचा आपने…..
जब हम निगमन की पुस्तक में देखते है कि इस्राइलियों को जब व्यवस्था दी गई थी, तब हम इन बातों को वहां सुनते है,
निर्गमन 19:5-6
5] इसलिए अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे; समस्त पृथ्वी तो मेरी है।
6] और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे।’ जो बातें तुझे इस्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।”
अब देखिए की संत पत्रस भी अपनी पत्री में वही बाते कर रहे है, कि अगर हमारा जन्म उसके वचन के द्वारा नहीं होगा,
तो हम उसके योजकों का समाज नहीं बन सकते…
तो born again यानी नए सिरे से जन्म लेना ये सिर्फ किसी एक जाती के लिए नहीं है, ये हम समझ पाते है…
जिस तरह परमेश्वर पिता ने शुरुआत में नर और नारी को अपने स्वरूप और समानता में बनाया उसी तरह, परमेश्वर पिता चाहते है कि हर एक जाती का उनके वचन के द्वारा नया जन्म हो.
तभी पवित्र आत्मा उनको वरदान में मिलेगा ताकि सब परमेश्वर की व्यवस्था उनके वचन पे चल सके…

अब हम देखते ही मसीह प्रभु ने किस तरह निकोदेमस से बोला कि नए सिरे से जन्म होना चाहिए…
यूहन्ना 3:1-12
[1] फरीसियों में से नीकुदेमुस नाम का एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था।
2] उसने रात को यीशु के पास आकर उससे कहा, “हे रब्बी, हम जानते हैं, कि तू परमेश्वर की ओर से गुरु होकर आया है; क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।”
3] यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच-सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।”
4] नीकुदेमुस ने उससे कहा, “मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?”
5] यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मेतो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।
6] क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।
7] अचम्भा न कर, कि मैंने तुझ से कहा, ‘तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।’
8] हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसकी आवाज सुनता है, परन्तु नहीं जानता, कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।” (सभो. 11:5)
9] नीकुदेमुस ने उसको उत्तर दिया, “ये बातें कैसे हो सकती हैं?”
10] यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “तू इस्राएलियों का गुरु होकर भी क्या इन बातों को नहीं समझता?
11] मैं तुझ से सच-सच कहता हूँ कि हम जो जानते हैं, वह कहते हैं, और जिसे हमने देखा है उसकी गवाही देते हैं, और तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते।
12] जब मैंने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं, और तुम विश्वास नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूँ, तो फिर क्यों विश्वास करोगे?
तो नया जन्म लेने के लिए हमे अपनी माता की गर्भ में फिर से नहीं जाना, बल्कि हमे पवित्र आत्मा से जन्म लेना जरूरी है,
क्योंकि अगर हम शुरुआत में देखे तो, आदम और हव्वा की मृत्यु आत्मिक रीति से हुई थी, यही पिता परमेश्वर ने उनको बोला था कि, जिस दिन तुम आज्ञा नहीं मानोगे तुम मर जाओगे…
और यही बाते हमे नए नियम में उड़ाव पुत्र के दृष्टांत में मिलती है, कि वो पिता अपने बड़े बेटे से कहता है कि देख ये तेरा वही भाई है जो मर गया था, और अब फिर आगया है, क्योंकि वो शरीर में नहीं आत्मा में मर गया था…
और यही बाते संत पॉल इफिसियों के अध्याय 2 में लिखते है,
इफिसियों 2:1-3
1] और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।
2] जिनमें तुम पहले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के अधिपति अर्थात् उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न माननेवालों में कार्य करता है।
3] इनमें हम भी सब के सब पहले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएँ पूरी करते थे, और अन्य लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।
तो जब हम आज्ञा ना मानने वाली उस बुरी आत्मा की सुनते है तो, तब हम शरीर में तो जीवित होते है लेकिन आत्मा में मरे हुए होते है…
conclusion/ निष्कर्ष
जब तक हमारा वचन के द्वारा आत्मा में जन्म नहीं होगा, तब तक हम उसके राज्य का उसके योजकों के समाज का भाग नहीं हो सकते है.
जब तक उसके वचन से हमारे मन छीद न जाए.
और हमारे मनो का छिदना ही हमे नई वाचा को दर्शाता है…
आखिरी कुछ वचन पढ़ते है…
इब्रानियों 8:7-12
[7] क्योंकि यदि वह पहली वाचा निर्दोष होती, तो दूसरी के लिये अवसर न ढूँढ़ा जाता।
8] पर परमेश्वर लोगों पर दोष लगाकर कहता है, “प्रभु कहता है, देखो वे दिन आते हैं, कि मैं इस्राएल के घराने के साथ, और यहूदा के घराने के साथ, नई वाचा बाँधूँगा
9] यह उस वाचा के समान न होगी, जो मैंने उनके पूर्वजों के साथ उस समय बाँधी थी, जब मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया, क्योंकि वे मेरी वाचा पर स्थिर न रहे, और मैंने उनकी सुधि न ली; प्रभु यही कहता है।
10] फिर प्रभु कहता है, कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने के साथ बाँधूँगा, वह यह है, कि मैं अपनी व्यवस्था को उनके मनों में डालूँगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूँगा, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा, और वे मेरे लोग ठहरेंगे।
11] और हर एक अपने देशवाले को और अपने भाई को यह शिक्षा न देगा, कि तू प्रभु को पहचान क्योंकि छोटे से बड़े तक सब मुझे जान लेंगे।
12] क्योंकि मैं उनके अधर्म के विषय में दयावन्त होऊँगा, और उनके पापों को फिर स्मरण न करूँगा।”
यहेजकेल 36:24-27
[24] मैं तुम को जातियों में से ले लूँगा, और देशों में से इकट्ठा करूँगा; और तुम को तुम्हारे निज देश में पहुँचा दूँगा।
25] मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे; और मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा।
26] मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा; और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुम को माँस का हृदय दूँगा।
27] मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूँगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे।
यही वो बाते है, जो मसीह प्रभु युहन्ना के सुसमाचार में सिखा रहे है….
की जिस किसीका नए सिरे से जन्म आत्मा में नहीं होगा, जो परमेश्वर पिता की आज्ञा उसके वचन को नहीं जिएंगे वो उसके राज्य के लोग नहीं होंगे.
बल्कि मसीह सीखाते है कि, हमे आत्मा में वचन के द्वारा नया जन्म लेना चाहिए.
और जो जो व्यक्ति नए सिरे से आत्मा में वचन के द्वारा जन्मेगा वही अंतिम तुरही के बजने पे बदलकर नए शरीर को धारण करेगा,
जैसा कि वचन में लिखा भी है,
1 कुरिन्थियों 15:51-54
51] देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूँ: कि हम सब तो नहीं सोएँगे, परन्तु सब बदल जाएँगे।
52] और यह क्षण भर में, पलक मारते ही अन्तिम तुरही फूँकते ही होगा क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे।
53] क्योंकि अवश्य है, कि वह नाशवान देह अविनाश को पहन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहन ले।
54] और जब यह नाशवान अविनाश को पहन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, “जय ने मृत्यु को निगल लिया।
• हमारी जय उसी मै है कि, जब हम नए सिरे से पवित्र आत्मा में जन्म लेंगे, तभी हम मृत्यु पे जय पाएंगे, और हम अमरता के देह यानी अविनाशी शरीर को पहन लेंगे.
यही है नए सिरे से जन्म लेने की परिपूर्णता.
मै आशा करता हु कि आपको इन वचनों से कुछ नया सीखने मिला हो, आप सभी को शालोम शालोम…
संदेश रणदिवे